हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, लखनऊ के इमामबाड़ा ग़ुफ़रान मआब में आयोजित इस मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना कल्ब जवाद नक़वी ने यही बातें दोहराईं और कहा कि इमाम हुसैन (अ) की शहादत हज़रत इब्राहीम (अ) के सपने की ताबीर है। हज़रत इस्माईल (अ) की कुर्बानी पूरी नहीं हुई थी, लेकिन उन्हें फिर भी “ज़बीहुल्लाह” कहा जाता है, जबकि इमाम हुसैन (अ) ने अपनी शहादत देकर उस दिव्य सपने को पूर्ण कर दिया, इसलिए उनकी शहादत को “ज़बह-ए-अज़ीम” कहा जाता है।
मजलिस के दौरान उन्होंने अहलेबैत (अ) के फ़ज़ाइल का भी उल्लेख किया और कहा कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम (स) ने हज़रत अली (अ) के बारे में फ़रमाया था कि तुम्हारे बीच सबसे अधिक श्रेष्ठ, सबसे अधिक ज्ञान रखने वाले और सबसे अच्छे निर्णय करने वाले अली हैं।

उन्होंने कहा कि हज़रत अली (अ) कभी किसी के दरवाज़े पर सवाल लेकर नहीं गए, लेकिन पूरी दुनिया का उनके दरवाज़े पर आना इस बात का प्रमाण है कि अली से अधिक कोई श्रेष्ठ नहीं, उनसे बड़ा कोई आलिम नहीं और उनसे बेहतर निर्णय करने वाला कोई नहीं।

मौलाना ने आगे कहा कि अली (अ) को न शासन की आवश्यकता थी और न ही ख़िलाफ़त की। जिनका शासन जिन्नों, इंसानों और ज़मीन-आसमान पर हो, उन्हें दुनिया की हुकूमत की इच्छा नहीं हो सकती। इसी कारण अली (अलैहिस्सलाम) ख़िलाफ़त माँगने किसी के पास नहीं गए, बल्कि ख़िलाफ़त स्वयं उनके पास आ गई।
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